याद रखने के दो नियम
- फ़ैब्रिक (कपड़ा, ज़्यादातर साड़ियों समेत) पर हर कीमत पर 5% GST।
- रेडीमेड कपड़ों और मेड-अप सामान पर ₹2,500 प्रति पीस तक 5% और ऊपर 18%, बिना GST और छूट के बाद पीस की कीमत पर।
22 सितंबर 2025 से पहले कपड़ों की सीमा ₹1,000 थी, 5% और 12% के साथ। कपड़ों पर 12% की दर अब लागू नहीं है।
कपड़े की दुकान के लिए HSN कोड और GST दरें
| आप क्या बेचते हैं | HSN (अध्याय / हेडिंग) | GST |
|---|---|---|
| सिल्क फ़ैब्रिक और सिल्क साड़ियाँ | 5007 | 5% |
| कॉटन फ़ैब्रिक और कॉटन साड़ियाँ | 5208 – 5212 | 5% |
| पॉलिएस्टर और दूसरे सिंथेटिक फ़िलामेंट फ़ैब्रिक (साड़ियाँ भी) | 5407 – 5408 | 5% |
| सिंथेटिक स्टेपल फ़ाइबर फ़ैब्रिक (जैसे पॉली-विस्कोस सूटिंग) | 5512 – 5516 | 5% |
| ऊनी फ़ैब्रिक | 5111 – 5113 | 5% |
| निटेड फ़ैब्रिक | 6001 – 6006 | 5% |
| निटेड कपड़े (टी-शर्ट, इनरवियर, लेगिंग्स…) | अध्याय 61 | ₹2,500 प्रति पीस तक 5%, ऊपर 18% |
| बुने हुए कपड़े (शर्ट, पैंट, कुर्ती, ब्लाउज़…) | अध्याय 62 | ₹2,500 प्रति पीस तक 5%, ऊपर 18% |
| मेड-अप (बेडशीट, तौलिये, पर्दे…) | अध्याय 63 | ₹2,500 प्रति पीस तक 5%, ऊपर 18% |
हर आइटम का सही 4 या 6 अंकों का कोड अपने अकाउंटेंट या सप्लायर के इनवॉइस से जाँचें। हेडिंग मटीरियल और पीस के बनने के तरीक़े पर निर्भर करती है।
साड़ी फ़ैब्रिक है या गारमेंट?
साड़ी आम तौर पर अपने मटीरियल की हेडिंग में बुना हुआ फ़ैब्रिक मानी जाती है (सिल्क के लिए 5007, कॉटन के लिए 5208 – 5212, पॉलिएस्टर के लिए 5407), इसलिए कीमत कुछ भी हो, 5%। पहनने के लिए तैयार सिली हुई साड़ी, या सिले ब्लाउज़ के साथ बिकने वाली साड़ी अलग श्रेणी में आ सकती है। ऐसी बेचते हैं तो अकाउंटेंट से पूछें।
₹2,500 की सीमा कैसे काम करती है
- प्रति पीस, प्रति बिल नहीं₹1,000 की चार शर्ट का बिल ₹4,000 है, पर हर पीस ₹2,500 से कम है, इसलिए चारों पर 5%।
- छूट के बादGST से पहले ₹2,800 की कुर्ती 15% छूट पर ₹2,380 में बिके, तो 5%।
- बिना GSTअगर कीमत में GST शामिल है, तो पहले 5% निकालें: ₹2,600 ÷ 1.05 = ₹2,476, इसलिए ₹2,600 की शर्ट पर 5%। GST सहित ₹2,625 तक 5%।
कोई भी कीमत कपड़ों के GST कैलकुलेटर में आज़माएँ।
बिल पर HSN के कितने अंक
- टर्नओवर ₹5 करोड़ तक: रजिस्टर्ड कारोबारों के बिल (B2B) पर 4 अंक; ग्राहकों के बिल (B2C) पर वैकल्पिक।
- टर्नओवर ₹5 करोड़ से ऊपर: हर बिल पर 6 अंक।